Sunday, July 19, 2009

अकेलापन

ये किसी को काटता है
तो किसी को कचोटता है ।
कोई इससे बोर होता है
तो किसी को ये उदासीन करता है ।

किसी का समय कटना दुभर करता है
तो किसी को उसकी, अप्रियता का आभास कराता है ।
कई वार यंहा तक होता है कि -
आप सबके साथ होते है तब भी ,ये आपके साथ होता है।

सबसे आपके विचार नही मिलते है
इसीसे, इसका आभास होता है ।
खुश रहिये कि सब का साथ है आपको मिला
विचार नही मिलते, इसका क्या करिये गिला ।

जब आप गए है स्वयं के
विचारों को अच्छी तरह जान ।
ठीक रहेगा अब बनाना
अपनी अलग ही एक पहचान ।

करिये वो ही जो आपको
आपकी आत्मा को अच्छा लगता है ।
व्यस्त रखिये अपने को
फिर देखिये अकेलापन कैसे भगता है

4 comments:

Swatantra said...

Kya mast likha hai aapne.. jab aap sab ke saath hote hai to bhi yeh aapke saath hota hai..

God bless you with the beautiful moments in life!!

Apanatva said...

thanks
mai to rahatee hoo vyast aur sath hee mast .

Amita said...

kya khhob kaha hai aap ne....
"kariya vo hi jo aap ko aap ki atma ko accha lagta hai
vyast rakhiya apne ko phir dekhiye akelapan kaise bhhagta hai"

its so true !!

Apanatva said...

thanks Amita!