Thursday, January 28, 2010

बहार

हमेशा वर्तमान
ही रहे अगर
जीवन में हमारा
केंद्र बिन्दु

शायद इस से
भविष्य कभी नहीं
बनेगा चिंता का
विषय , मेरे बंधू

जब है आप व्यस्त
तो समय कंहा
कि बैठ करे नाहक
चिन्ता , विचार

आज सुधारिये
बोइये , सींचीये
तब ही तो आएगी
जीवन मे कल बहार

21 comments:

मनोज कुमार said...

इस कविता में यथार्थबोध के साथ कलात्मक जागरूकता भी स्पष्ट है।

sangeeta swarup said...

बहुत सटीक बात कही है..हम लोग भूत और भविष्य पर ही विचार करते हैं और आज जो वर्तमान है उसे नज़रंदाज़ ...बहुत खूब शिल्प है...बधाई

ह्रदय पुष्प said...

आज सुधारिये
बोइये, सींचीये
तब ही तो आएगी
जीवन मे कल बहार।
बीती ताहि बिसारिये - आगे की सुधि लेऊ.
छोटी बात बड़ी सीख

हास्यफुहार said...

विचारोत्तेजक!

sada said...

बहुत ही सही कहा आपने, अनुपम शब्‍द रचना ।

रश्मि प्रभा... said...

baat to sahi hai,par aisa kahan hai !

KAVITA RAWAT said...

जब है आप व्यस्त
तो समय कंहा
कि बैठ करे नाहक
चिन्ता , विचार
Bahut achhi baat kahi aapne Maaji..

Manoj Bharti said...

बहुत सुंदर ढ़ंग से वर्तमान में जीने की राह बताई है ।

Babli said...

जब है आप व्यस्त
तो समय कंहा
कि बैठ करे नाहक
चिन्ता , विचार ।
बिल्कुल सही कहा है आपने! बहुत अच्छी लगी खासकर ये पंक्तियाँ! सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ आपने शानदार रचना लिखा है!

JHAROKHA said...

Aadarnniya aapanatv ji aapane ekdam sahi kha .jab ham mauj masti main khooye rahate hain to fir bhviysa ki chinta kahan karate hain bahut hi khari baat kaaahi hai aapane aati sundar .
poonam

Anonymous said...

Sarita,

Maine tumhari kavita padi. bahut accha laga.

Pushpa

दिगम्बर नासवा said...

आज सुधारिये
बोइये , सींचीये
तब ही तो आएगी
जीवन मे कल बहार ...

आशा और सुखी जीवन का दर्शन छिपा है इस रचना में .......... बहुत अच्छा लिखा .......

ज्योति सिंह said...

waah aasha ke saath jeevan nirwaah karne ka sandesh deti hui ye rachna kabile tarif hai .bahut hi sundar ,aaj ki jaroort .

Navendu said...

so true...we cannot just keep thinking about future without working on present..further we also need to enjoy the present...else there will be no moment left in future..and we will fall back in the loop

गीता पंडित (शमा) said...

bahut chahane par bhee aisa nahin ho pata.....kash! ausa hota...to

koee nayan badhlee na bante
keval kajaree kahate|


aapko padna achchha laga...

s-sneh
Gita

kshama said...

Kitne sanjeeda saral khayalaat hai" apnatv" nazar ata hai!

Rakesh said...

apantava ...bahut sahi v sachaa sandesh ..jaisa boyenge waisa kaatenge ....bhavisya ke sudhar hetu aapko aaj ke kshan ko jeene ki gunvatta per dhyan dena hoga ...dhanyawad ...

Parul said...

bahut khoob!
aur aapke apar sneh ke liye main aabhari hoon

Avinash Chandra said...

Aaj shaayad pahli baar padha aapko... bilkul sahi sandesh deti rachna
badhayee ho

Parul said...

ravish ji ka blog -nai sadak.blogspot.com...
"sadi ka mahanalayak" isi article ne mujhe likhne ko majboor kiya hai..
aapka bhi hardik aabhar!

Kulwant Happy said...

अद्भुत रचना। कल की फिक्र में आज खत्म कर लेते है..तो कल का खत्म होना लाजमी है। आपके विचार से सहमत हूं। रिधम और उसकी मम्मी दोनों ही खुश हैं।

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