Wednesday, January 6, 2010

सपना

सपना देखते देखते
ही नींद टूटी ।
लगा आज देर
से मै उठी ।
जल्दी जल्दी काम
मे , मै जुट गई ।
सपना क्या था
ये भी भूल गई ।
पर अन्तः करण मे कंही
ये एहसास था ।
बड़े ही हल्केपन का
आभास साथ था ।
लग रहा था जैसे
सारा जंहा ही
है बस अपना ।
दुआ कर रही कि
सभी को आए
ऐसा ही सपना ।

12 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

खूबसूरत एहसास से सजी अच्छी रचना....बधाई

Swatantra said...

cute dreams...

Navendu said...

nice :)

हास्यफुहार said...

बहुत अच्छी कविता।

Neelesh K. Jain said...

Apanatva ke ehsaas ka naya andaz...achcha laga...aur kamna hai aage bhi isi tarah lagta rahe

Aapka Neelesh,
neelesh.nkj@gmail.com
Mumbai

sm said...

beautiful poem full of emotions.

दिगम्बर नासवा said...

सपने में मासूम एहसास जागें तो अछा लगता है ........ सुंदर अभिव्यक्ति है ......

Urmi said...

आपको और आपके परिवार को नए साल की हार्दिक शुभकामनायें!
बहुत बढ़िया रचना लिखा है आपने!

Urmi said...
This comment has been removed by the author.
निर्मला कपिला said...

बहुत सुन्दर सपना है ऐसे सपने तो रोज़ रोज़ आयें बहुत सुन्दर रचना है बधाई

संजय भास्‍कर said...

यें बहुत सुन्दर रचना है बधाई

amita said...

क्या बात हैं ?
आप की दुआ हमें कुबूल हैं....
धन्यवाद