Monday, April 26, 2010

सम्भावना

जब

शांत

सरल
संतुष्ट
चित्त को
कल्पित
सम्भावना
भरमा
जाती है ।

तब

बैचेनी
आतुरता
उत्सुकता
सभी सुप्त
भावनाए
फिर से
गरमा
जाती है ।

29 comments:

देवेश प्रताप said...

बेहतरीन प्रस्तुती .....

Parul said...

so nice!

kshama said...

Behad sundar rachana..wah!

संजय भास्कर said...

... बेहद प्रभावशाली अभिव्यक्ति है ।

दिगम्बर नासवा said...

kalpit bhaavnaayen ... ye aati hi kyon hain man mein ... kuch adhoori bhaavnaon ka dard hot hai ... bahut achhaa likha hai aapne ...

रश्मि प्रभा... said...

bahut sahaj prastuti .... sambhanaon ki

आशीष/ ASHISH said...

Cause and effect, encapsulated well!

sangeeta swarup said...

ये कल्पित भावनाएं सभी सुप्त भावनाओं को क्यों भरमा जाती हैं? सटीक लेखन..

SAMVEDANA KE SWAR said...

अनूठी भावनाएँ...

मनोज कुमार said...

अद्भुत! प्रेरक!

अरुणेश मिश्र said...

अन्तरतम का स्वर । प्रशंसनीय ।

Anonymous said...

Hey mama,

I'm trying to read and understand all your new poems.

Congrats on hitting hundred! You should consider publishing some.

xoxoxoxoxo,
me

Dimpal Maheshwari said...

जय श्री कृष्ण...अति सुन्दर....बहुत खूब....बड़े खुबसूरत तरीके से भावों को पिरोया हैं...| हमारी और से बधाई स्वीकार करें..

dipayan said...

हर बार की तरह एक सुन्दर रचना । बधाई आपको ।

कविता रावत said...

सहज रूप से भावनाओं की भावपूर्ण प्रस्तुति के लिए धन्यवाद

Babli said...

अत्यंत सुन्दर और प्रभावशाली रचना प्रस्तुत किया है आपने जो प्रशंग्सनीय है! बधाई!

Dr. shyam gupta said...

आपके ब्लोग पर आने का मौका मिला---मानव भावनाओं का सुन्दर-सार्थक चित्रण किया है आपने.

Saumya said...

what a thought!!!..

शोभना चौरे said...

apntv ji
bahut sundar vicharo ki prstuti
mera svasth theek hai .kuch parivarik vystta ke rhte blog par aana km ho rha hai .
bhut bhut dhnywad abhibhoot hooo aapke apnepan se .

mridula pradhan said...

bahut hi sunder likhtin hain aap.

रचना दीक्षित said...

सभी सुप्त
भावनाए
फिर से
गरमा
जाती है

वाह !!!!!!!!! क्या बात है..... बहुत जबरदस्त अभिव्यक्ति.अच्छे हैं मन के ये उदगार

nilesh mathur said...

आपकी बातों में एक अलग अंदाज है! सुन्दर रचना !

sada said...

सहज शब्‍दों में गहरे भाव लिये हुये अनुपम प्रस्‍तुति ।

Shayar Ashok said...

वाह !! क्या बात है.....बहुत खूब ||

psingh said...

बहुत ही लाजबाब पोस्ट
आभार..............

निर्झर'नीर said...

exceelent

सतीश सक्सेना said...

कल्पित क्यों ? साकार करने का प्रयास क्यों न किया जाये ?

ज्योति सिंह said...

sundar vichar aur sundar rachna

amita said...

कल्पना की उड़ान पे कोई लगाम नहीं हैं,
और जब उड़ान भरने लगे तब ?
तब

बैचेनी
आतुरता
उत्सुकता
सभी सुप्त
भावनाए
फिर से
गरमा
जाती है ।

wave of emotional turbulence is so well crafted in this post...