Friday, April 2, 2010

निकाहनामा

दो दिन से हर टी वी चैनेल पर
शोर गया है मच
आयशा का ये निकाहनामा
झूठ है या सच ?

आज ये बात समझ मे
पूरी तरह से है आई ।
बुजुर्गो ने कान पक गए
ये कहावत क्यों बनाई ।

तिल का ताड़ करना
कोई इनसे सीखे ।
ना बाबा ना ये कला
सीख आप क्या कीजे ?

26 comments:

sangeeta swarup said...

:):)

सच में कान पक गए हैं...बढ़िया व्यंग

Manoj Bharti said...

मीडिया कान पकाने का काम कर रहा है ...मीडिया के पास भारत की जनसंख्या, भुखमरी, गरीबी, बीमारी और स्वास्थ्य आदि की कोई खबर नहीं है ... क्या यही चौथे स्तंभ का असली चेहरा है ???

Babli said...

बहुत ही सुन्दरता से आपने व्यंग्य किया है! सही में कान पाक गए सान्या और शोएब की ख़बर हर एक चैनल पर लगातार सुनकर!

मनोज कुमार said...

अच्छा व्यंग्य!

रश्मि प्रभा... said...

aajkal to kaan pakau hi baaten adhik hoti hain .......

Smita Srivastava said...

So true . u have so beautifully enveloped the entire news !!

sada said...

बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

Parul said...

hehehe....... intresting!

manav vikash vigyan aur adytam said...

characha me bane rahane ke liye kuchh to karana hai sadi aur talak he sahi

ज्योति सिंह said...

aajkal aese charche par maje bhi liye jaate aur waqt bhi barbad kiye jaate hai ,kuchh nahi to yahi sahi .badhiya .

कृष्ण मुरारी प्रसाद said...

मैंने तो सानिया को आशीर्बाद दे दिया है....
...
सानिया मिर्ज़ा---तुम जहाँ भी रहो खुश रहो..(पुरुषों ने तुम्हारे लिए किया क्या है.?
http://laddoospeaks.blogspot.com/2010/04/blog-post_03.html

Saumya said...

yeah...very true...gud one..

Jyotsna said...

हिन्दी ब्लौगरों में से लगभग आधे पत्रकार हैं लेकिन सब चुप बैठे हुए है.
चुप क्यों न बैठें, ये उनकी रोजी-रोटी से जुडी बात जो है.
अब तो पत्रकार शब्द सुनकर ही चिढ होने लगी है.
धन्य हो तुम पत्रकारों!
तुम नहीं हो तो ये पृथ्वी घूमनी बंद हो जाये!
आसाराम ने ठीक कहा था - "तुम साले सब कुत्तों की तरह पिल पड़ते हो'.

Amit kumar said...

acha hai

देवेश प्रताप said...

सटीक व्यंग्य ....बहुत खूब

Yatish said...

पहली बार आया हूँ इस गली
बहुत अच्छा लगा
आपके ज़ज्बात पढ़कर
कुछ अपना सा लगा


कभी अजनबी सी, कभी जानी पहचानी सी, जिंदगी रोज मिलती है क़तरा-क़तरा…
http://qatraqatra.yatishjain.com/

JHAROKHA said...

bahut hi badhiya,is post ke jariye aapne kahavato ke bhi mayane bataa diyejo hamari paramparaon se judi hui hai. bahut hi achha laga.

vishnu-luvingheart said...

bahut khoob........

दिगम्बर नासवा said...

आपकी व्यंगात्मक शैली में लिखी बात बहुत अच्छी लगी ...

रचना दीक्षित said...

वाह जी वाह मज़ा आ गया. आज कल तो बस Head Line सुन लो समाचार का पता चल ही जाता है
एक अच्छा करारा व्यंग

Pankaj Upadhyay (पंकज उपाध्याय) said...

:)

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

सुन्दर व्यंग कविता है...

Dr.Ashok said...

definitely a very sad state of mind, time, country and people.
saat din tak TV na dekho, Akhbar na padho, to bhi zindagi mein kutch khas antar nahin padta. balki so kar hum fresh uthte hain.
Ab news mein views nahin kewal mirch masala (Jhansi ki Narayan ki Chaat) very tasty.........

Reetika said...

:-)..aisa lag raha hai zindagi mein pehli baar koi doosri shaadi karne chala hai...

mridula pradhan said...

wah kya baat kahi hai.

Dr.Ashok said...

Nikah ke saath Naama, ya ise kahen DAHEZ aur Dahez ki vyakhya hai DAAH
(Unnecessary Daah sanskar- Jalana, Maarna, Vikshipt kar dena etc. se bachaane ke avaz me diya gaya dhan)

Please comment.