Monday, March 22, 2010

माटी

सुनामी , भूकंप
दुर्घटना , हादसे
सूखा , महंगाई ।
आम आदमी पर
विपदा चारों ओर
से हे घिर आई ।
इन्हीसे तो जुड़ी है
दुःख और वेदनाए ।
कोई आखिर जाए तो
अब किधर जाए ।
व्यथित लोगो के
अविरल बहते आँसू
मेरे दिल को पूरा
भिगोए रखते है
रिश्तों की गर्माहट
और मेरे तपते जज्वात
भी दिल की माटी को
सूखा नहीं रख पाते है ।
शायद इसी लिये
मेरा दिल अपने लिये
और सबके लिये
मात्र धड़कता है ।
कभी टूटता नहीं
तडकता नहीं
गीली माटी का
जो बना है
गीली माटी से
ही ये सना है
ये तो बस जुड़ना
और जोड़ना
जानता है
हर एक दुःख को
अपना मानता है

23 comments:

देवेश प्रताप said...

बहुत बढ़िया प्रस्तुति ......आज इंसान प्रकृति कि ही मार झेल रहा है

मनोज कुमार said...

मात्र धड़कता है ।
कभी टूटता नहीं
तडकता नहीं ।
गीली माटी का
जो बना है ।
गीली माटी से
ही ये सना है ।
ये तो बस जुड़ना
और जोड़ना
जानता है ।
हर एक दुःख को
अपना मानता है ।
रिश्तों की गर्माहट बनी रहे। संवेदनाएं हमें जोड़्ती हैं। बहुत अच्छी प्रस्तुति।

शोभना चौरे said...

snvednsheel hrday hi ye sab mhsoos kar skta hai |gili mitti ka sundar pryog kiya hai apne bhavnao ke sath .

रचना दीक्षित said...

कितनी सकारात्मक सोच,सच ही गीली माटी का बना है आपका दिल तभी तो इतना कुछ समेटे हुए है और जोड़ना जानता है,कमाल है वो भी आज के जमाने में

दीपक 'मशाल' said...

Aapki kavitaon jaisi sadgi aur ravangee bahut kam dekhne ko milti hai.. gambheer mudde bhi asani se utha leti hain kavita me.

नीरज गोस्वामी said...

अद्भुत रचना है...द्रवित कर देती है पढने वाले को...बहुत दिनों से चल रही व्यस्तता को ताक पर रख कर आज आया हूँ और भाव विभोर हो रहा हूँ...लिखती रहिये...
नीरज

हरकीरत ' हीर' said...

कभी टूटता नहीं
तडकता नहीं ।
गीली माटी का
जो बना है ।

bahut khoob .....!!

Babli said...

बेहद ख़ूबसूरत और भावपूर्ण रचना प्रस्तुत किया है आपने!

दिगम्बर नासवा said...

रिश्तों के जल से मिल कर गीला रहना ही अच्छा होता है .... अच्छी रचना है आपकी ......

सतीश सक्सेना said...

लगता है अपने को पढ़ रहा हूँ ....

ज्योति सिंह said...

मात्र धड़कता है ।
कभी टूटता नहीं
तडकता नहीं ।
गीली माटी का
जो बना है ।
गीली माटी से
ही ये सना है ।
ये तो बस जुड़ना
और जोड़ना
जानता है ।
हर एक दुःख को
अपना मानता है ।
sach ek atoot ,maarmik man ko bheega gayi ,aese haadse dil hila dete hai ,sundar likha .

sidheshwer said...

अच्छी अभिव्यक्ति !

amita said...

सरिता जी
"माटी" ने आज मेरे दिल को
हिलाकर रख दिया हैं
amazing !! so true !
I have no words to express...
your thought process have
just flown into words.
I am deeply touched

sangeeta swarup said...

बहुत सादगी से लिखी है बहुत संवेदनशील रचना ...बस ये माटी गीली रहे और संवेदनाएं यूँ ही मुखरित रहें...

संहिता said...

सुन्दर कविता, सुन्दर भाव ।
माटी ही है जो सबको बान्धे हुए है ,मानवता को संजोए हुए है ।

वन्दना अवस्थी दुबे said...

ये तो बस जुड़ना
और जोड़ना
जानता है ।
हर एक दुःख को
अपना मानता है
बहुत सुन्दर रचना. बधाई.

sm said...

beautiful
and very touching

ये तो बस जुड़ना
और जोड़ना
जानता है ।
हर एक दुःख को
अपना मानता है ।

sm said...

beautiful
and very thoughtful
ये तो बस जुड़ना
और जोड़ना
जानता है ।
हर एक दुःख को
अपना मानता है ।

हेमंत कुमार ♠ Hemant Kumar said...

व्यथित लोगो के
अविराम बहते आँसू
मेरे दिल को पूरा
भिगोए रखते है ।
रिश्तों की गर्माहट
और मेरे तपते जज्वात
भी दिल की माटी को
सूखा नहीं रख पाते है ।

खूबसूरती से सन्जोयी गयी रचना ---हार्दिक बधाई

kshama said...

Kitni sahaj,saraltase baat kah dee!
Ramnavmiki anek shubhkamnayen!

dipayan said...

मात्र धड़कता है ।
कभी टूटता नहीं
तडकता नहीं ।

बहुत सुन्दर तरीके से दिल की व्यथा का वर्णन किया आपने । भावपूर्ण रचना ॥

रश्मि प्रभा... said...

रिश्तों की गर्माहट
और मेरे तपते जज्वात
भी दिल की माटी को
सूखा नहीं रख पाते है
bahut hi auchitypurn rachna

Ravi Rajbhar said...

bahut hi sunder prashtuti
badhai rachna ke liye.