Friday, March 12, 2010

जालसाज़

जालसाजी भी एक अच्छा
खासा धंधा बन गयी है
बीमारी की तरह अब ये
चारो और फ़ैल गयी है ।

झांसा देने वाले लोग तो
होते है बड़े ही शातिर
आम आदमी शिकार बनता
लालच , अज्ञान के खातिर ।

खुदा की नज़रे भी
क्यों नहीं पड़ती इन पर ?
कंहा पहुचेंगे ये ऐसी
भटकी राह पर चलकर ?

इंसान ना साथ कुछ लाया है
ना ही साथ ले जाता है ।
ये साधारण सी बात भी क्या
जालसाज़ समझ नहीं पाता है ?

23 comments:

sangeeta swarup said...

यदि ये बात समझ आ जाये कि इकोई भी अपने साथ कुछ ना लाता है और ना ले जाता है तो जालसाजी छोडिये..कोई भी दंगा फसाद ना हो...

अच्छी सोच के साथ चिन्तायुक्त रचना..

सतीश सक्सेना said...

कुछ अधिक ही चिंतित लग रही हैं , दुनियां के सबसे पुराने रोजगारों में से एक है यह ! जल्साजे के लिए घर से निकलते समय वाकायदा पूजा और हवन देवी प्रतिष्ठा करके की जाती है तब जाते हैं यह लोग अपने धंधे पर !
शुभकामनायें !!

रश्मि प्रभा... said...

bilkul sahi soch

Babli said...

आपने सच्चाई को बखूबी शब्दों में पिरोया है! अगर हर इंसान अपने लिए और दूसरों के लिए भला सोचते तो हमारे देश में न तो चोरी, डकैती, खून खराबी, दंगा फसाद और न जालसाज़ी जैसे घिनौने काम होते! काश आपकी इस रचना का असर हर एक इंसान पर पड़ता तो हमारे देश की हालत में कुछ सुधार होता!

Hitesh said...

बहुत सुन्दर लिखा है आपने ! कम से कम साहित्य के जालसाज तो इससे कुछ सीख लेंगे.

Parul said...

sundar!

श्याम कोरी 'उदय' said...

इंसान ना साथ कुछ लाया है
ना ही साथ ले जाता है ।
....यह कटु सत्य है फ़िर भी लोग भूल जाते हैं और उलझे रहते हैं!!!!

Kulwant Happy said...

जालसाज की छोड़ आम आदमी भी कहाँ समझ पाया
उस कुदरत की माया

रचना दीक्षित said...

क्या कहें सब की अपनी अपनी फितरत है पर सच तो सच है और वो भी कटु
बधाई

शोभना चौरे said...

bilkul sahi kaha hai aapne .
pahle kuch log hi jalsaj hote the to rdooshan kam tha ab to lgta hai jalsazi ke bhi vishvvidhalay khole javege ?

Pankaj Upadhyay (पंकज उपाध्याय) said...

इंसान ना साथ कुछ लाया है
ना ही साथ ले जाता है ।
ये साधारण सी बात भी क्या
जालसाज़ समझ नहीं पाता है ?

सुन्दर...

शोभना चौरे said...

apnatvji apko mera mail mila ya nahi ?

शोभना चौरे said...

apnatvji
ye ap sab logo ka pyar hi hai apnapan hi hai jo sbne meri kami mhsoos ki .
mere bhnoi ke aksmik nidhan par mai kai dino tak shhar se bahr rahi,isiliye mai net se door rhi .
isi liye mane mail kiya tha shayd apka mailid sahi nahi hoga ?

sm said...

believe in rebirth and keep doing all these frauds thinking that in next life they will take place birth in same family and will enjoy the fruits of fraud.
excellent poem

KK Yadava said...

इंसान ना साथ कुछ लाया है
ना ही साथ ले जाता है ।
ये साधारण सी बात भी क्या
जालसाज़ समझ नहीं पाता है ?
कम शब्दों में ऊँची बात..सराहनीय प्रस्तुति !!

ज्योति सिंह said...

idhar 5-6 rachna par aapko aate nahi dekha sochi aakar dekhoon kya koi nayi rachna dali hai ,phir doosre ke blog se aai ,tabiyat to thik hai ,shobhna ji se kahan ki mere saath sarita ji bhi fikr karti rahi ,unke aane se tasalli hui .

psingh said...

satya ka ko ingit karti hui rachna
abhar..............

अभिषेक प्रसाद 'अवि' said...

vicharniya aur umda rachna... adbhutaas...

डॉ० डंडा लखनवी said...

आपकी चिंताएं जायज हैं......जीवन रहेगा तो समस्याएं रहेंगी। और समस्याओं के बीच समाधान भी होता है......आशावादी बनिए........
सदैव जीवन सदा समस्या, सदा समस्या का हल मिलेगा।
कुछ और गहरी जमीन खोदो, मिलेगा मरुथल में जल मिकेगा ॥
अगरचे बाटोगे आप खुशबू, तो हाथ महकेंगे आपके भी-
रही है छलने की जिनकी फितरत तो उनको बदले में छल मिलेगा ॥

सद्भावी-डॉ० डंडा लखनवी

JHAROKHA said...

aadarniya Sarita ji ek dam yatharth likha hai aapane aapaki rachana par sant kabir das ji ka ek doha yaad aa gaya.

doshh paraya dekh kar chale hsant hasnt
aapano yaad na aavai jako aadi na annat.
poonam

Suman said...

nice

amita said...

very nice and so true !

बेचैन आत्मा said...

इंसान ना साथ कुछ लाया है
ना ही साथ ले जाता है ।
ये साधारण सी बात भी क्या
जालसाज़ समझ नहीं पाता है ?
.....यही जीवन का सच है. दुनियाँ का सबसे बड़ा आश्चर्य भी यही है कि हम जानते हैं कि मृत्यु अटल है फिर भी लोभ में पड़े रहते हैं.
...अच्छे भाव जगाती कविता के लिए आभार.