Friday, February 19, 2010

आईना

मेरे कमरे के आईने पर
जब भी नज़र डालूँ मै
हर बार एक बदली सी
शकल नज़र आती है ।

जो मुझे चौंका जाती है
मेरी अपनी समझ
स्वयं को पहचानने मे
यूं उलझ सी जाती है ।

अखबार में पढ़े गए
समाचार रोज़ ही
मेरी भावनाओं से
खिलवाड़ करते है ।

कभी मुस्कान देते है
तो कभी देते है उदासी
कभी शांति देते है
है तो कभी बदहवासी ।

कभी सारी वेदना
मुझमे सिमट आती है
अपनी खुशियाँ भी इनके
तले दफ़्न हो जाती है ।

आईना तो जो देखे
वो ही है ये दिखाता ।
मेरे चेहरे के बदलते भाव
ये तो है भांप ही जाता ।

25 comments:

sangeeta swarup said...

सच है कि आईना झूठ नहीं कहता.... जैसी मन:स्थिति होती है वही भाव चेहरे पर होते हैं.... और यूँ शकल बदल जाती है....खूबसूरत रचना..गहरे भावों को समेटे हुए...

Parul said...

aks ki sacchai bayaan karti ek acchi rachna !

वन्दना अवस्थी दुबे said...

वाह बहुत सुन्दर रचना. बधाई.

मनोज कुमार said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति।
इसे 20.02.10 की चिट्ठा चर्चा (सुबह ०६ बजे) में शामिल किया गया है।
http://chitthacharcha.blogspot.com/

दीपक 'मशाल' said...

सच है.. वैसे आइना झूठ नहीं बोलता.. कहते तो यही हैं....
आईने को लेकर इंसानी तकलीफों पर बुनी बेहतरीन कविता..

Ravi Rajbhar said...

Very nice...

vishnu-luvingheart said...

sabse pahle to shukriya, ki aap mere blog pe aaye aur meri housla afjai ki.chahunga ki apka margdarshan aur housla afjai yu hi milti rahe.
Aapki kavita ke bare mein main likhu bas ek hi shabd "Lajawab"...."Aaina" pe kabhi mene bhi likha tha, mujhe smaran ho aaya...aur sath hi smaran ho aaya wo prasang bhi jiske karan ye panktiya mene likhi thi... " Ki hairan hai wo mujhe dekhkar, goya ki main mila hi nahi hu kabhi...auro se kya shikwa karun jab ye haal-e-aaina hai..."

शारदा अरोरा said...

बेहतरीन रचना , सच है हमारे भाव ही हमारी शक्ल बदल देते हैं |माफ़ कीजियेगा , कहीं कहीं थोड़ी हिंदी के व्याकरण की मामूली सी गल्तियाँ हैं ,मसलन ...डालूँ , चौंका , खिलवाड़ ,शांति , खुशियाँ | ..आप नई हैं इसलिए रोमन हिंदी में बदल न पाईं होंगी , हो सके तो बदल लें |

KAVITA RAWAT said...

आईना तो जो देखे
वो ही है ये दिखाता ।
मेरे चेहरे के बदलते भाव
ये तो है भांप ही जाता ।

यह सच है कि आईना कभी झूठ नहीं बोलता और वह मन के भावों की झलक दिखला देता है..
बहुत सुन्दर रचना
हार्दिक शुभकामनाएं .

knkayastha said...

मेरे कमरे के आईने पर
जब भी नज़र डालू मै...
...मेरे चेहरे के बदलते भाव
ये तो है भांप ही जाता ।

भावपूर्ण...वास्तविकता से भरपूर...सटीक सत्य....

Kulwant Happy said...

आईना और सितम अद्भुत हैं।

Devendra said...

आपकी कविता में शब्द-सौंदर्य भले कम हो लेकिन भाव इतने गाहरे होते हैं कि दिल में उतर जाते हैं.

निर्मला कपिला said...

मेरे कमरे के आईने पर
जब भी नज़र डालू मै...
...मेरे चेहरे के बदलते भाव
ये तो है भांप ही जाता ।
बिलकुल सही बात है आईना हमेशा सच बोलता है गहरे भाव लिये सुन्दर रचना । शुभकामनायें

kshama said...

आईना तो जो देखे
वो ही है ये दिखाता ।
मेरे चेहरे के बदलते भाव
ये तो है भांप ही जाता
Wah! Wah!
Waise aajkal na jane kaunsa aaeena dekh liya hamne ki, boltihi nahi,lekhan bhi band ho gaya hai!

Babli said...

अखबार में पढ़े
समाचार रोज़ ही
मेरी भावनाओं से
खिलवाड़ करते है ।
कभी मुस्कान देते है
तो कभी देते है उदासी
कभी शांति देते है
है तो कभी बदहवासी ।
वाह बहुत सुन्दर पंक्तियाँ! बिल्कुल सही कहा है आपने! इस उम्दा रचना के लिए बधाई!

भूतनाथ said...

hi-hi-hi-hi-hi....isi aayine kee tarah bani rahe haap....aur khili rahi aapki kavitaaye.....!!

दिगम्बर नासवा said...

अखबार में पढ़े
समाचार रोज़ ही
मेरी भावनाओं से
खिलवाड़ करते है ...

आईना कभी झूठ नही बोलता ... पर आज के दौर में हर कोई नया मुखोता लगा लेता है और आईना तो बस उसको ही दिखा देता है .... बहुत लाजवाब अभिव्यक्ति है आपकी ...

संहिता said...

दर्पन झुठ ना बोले । आपकी हर रचना लाजवाब !!!!

हरकीरत ' हीर' said...

har baar aapki kavita mein gahre bhav hote hain ....!!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आईना तो जो देखे
वो ही है ये दिखाता ।
मेरे चेहरे के बदलते भाव
ये तो है भांप ही जाता ।

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति!

ज्योति सिंह said...

aaina wahi rahta hai chehre badal jaate hai ,bahut khoobsurat rachna ,sangeeta ji ki baaton se main bhi sahmat hoon .

रचना दीक्षित said...

आईना तो जो देखे
वो ही है ये दिखाता ।
मेरे चेहरे के बदलते भाव
ये तो है भांप ही जाता ।

बहुत अच्छी प्रस्तुती एक अच्छे भाव के साथ बधाई स्वीकारें

रश्मि प्रभा... said...

aaina bahut kuch kahta hai, dil ke gubaar bhi dekh leta hai

संजय भास्कर said...

बिलकुल सही बात है आईना हमेशा सच बोलता है गहरे भाव लिये सुन्दर रचना । शुभकामनायें

amita said...

mirror is the best reflection of
ones own self....
very well expressed !!