Saturday, February 13, 2010

सितम

इंसान पर जब कभी
हैवानियत का रंग चढ़ जाए ।

अपनी सारी हदों को
बेखौफ वो पार कर जाए ।

चिंगारी को हवा दे
आग लगाने मे ये माहिर।

इनकी नियत मे खोट है
ये तो अब जग ज़ाहिर ।

कंही पर बम विस्फोट
तो कंही करे साजिश ।

क्या पा लेंगे ये हैवान
पैदा करके आपस मे रंजीश ।

ऊँच - नीच का अब
इन्हें होश भला कहाँ ?

अपने कदमो तले उन्हें
लगता है सारा जंहा ।

ये गफलत इन दरीन्दो की
ना जाने कब होगी ख़तम ?

कब इंसानियत की राह ये चलेंगे
कब ? कैसे ? खत्म होंगे इनके ये सितम ?

25 comments:

दिगम्बर नासवा said...

कब इंसानियत की राह ये चलेंगे
कब ? कैसे ? खत्म होंगे इनके ये सितम ..

सच लिखा है काश कब्बी तो ये इंसान इंसान बन कर भी रह सकें .... बहुत उम्दा बात कही है ....

कविता रावत said...

ये गफलत इन दरीन्दो की
ना जाने कब होगी ख़तम ?

कब इंसानियत की राह ये चलेंगे
कब ? कैसे ? खत्म होंगे इनके ये सितम ?
Bahut sundar likha hai maaji aapne. Sahi sawal karti.. Kash insaniyat ke dushmanon ko ye baat samjh aa jati to duniya mein kitna aman chain rahta..
Bahut shubhkamnaynen

Unknown said...

सितम ढाने वाले इस कविता को पढ़े तो वो अपने आप पे सर्मिन्दा हो जायेंगे ......

मनोज कुमार said...

विचारोत्तेजक! आपकी मान्यता पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।

Anonymous said...

कब ? कैसे ? खत्म होंगे इनके ये सितम?शायद कोई फरिस्था आ जाए और ये सब ख़त्म हों जाये.Happy valentines' day:)

निर्मला कपिला said...

कब इंसानियत की राह ये चलेंगे
कब ? कैसे ? खत्म होंगे इनके ये सितम ?
ये सवाल शायद सब को सता रहा है। बहुत अच्छी रचना है शुभकामनायें

Pankaj Upadhyay (पंकज उपाध्याय) said...

kaafi jagahon par ye line bol chuka hoon... 'insaan' ek vilupt parajati hai..

aajkal 'insaan' dikhte hi kitne hain..ye sab to bhagte hue putle hain jinhe kahan jana hai wo bhi pata nahin...

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

कंही पर बम विस्फोट
तो कंही करे साजिश ।

क्या पा लेंगे ये हैवान
पैदा करके आपस मे रंजीश ।
कब इंसानियत की राह ये चलेंगे
कब ? कैसे ? खत्म होंगे इनके ये सितम ?

सटीक लेखन....आपने इसे १२ दिनक को पोस्ट की ..और देखिये इंसानियत का नज़ारा १३ को ही दिख गया...
सन्देश देती हुई बहुत सार्थक रचना

Parul kanani said...

is sawaal ka jawaab to inhi sitam karne walon ke pas hai..

स्वप्न मञ्जूषा said...

aapki poori kavita ki soch lajwaab hai..
aur har pankti bemisaal...bahut hi acchi soch liye hue hai aapki kavita..aaj ke sandarbh mein kitini sacchi baatein kah rahi hai
sach bahut hi accha laga aapko padhna..
badhaii.

Urmi said...

बहुत ख़ूबसूरत और शानदार रचना लिखा है आपने जो काबिले तारीफ है! इस उम्दा रचना के लिए बधाई!

विवेक सिंह said...

सुन्दर एक एक लाइन ।

Smita Srivastava said...

Awesome !! your lovely words are really a magic . I'm always eager to read more of ur poems .
Also a warm thanks for putting in such a lovely poetic comment on my blog .

Smita
http://littlefoodjunction.blogspot.com/

Shalabh Gupta "Raj" said...

ham sab ke man ki baat kah di aapne... aakir kab tak yeh sitam....

इस्मत ज़ैदी said...

बहुत ही सुन्दर विचारों का प्रकटीकरण ,मन का दुःख शब्दों मेंबयाँ हो गया है ,सच है मालूम नहीं इनकी ये भूक कब शांत होगी

सम्वेदना के स्वर said...

मर्मस्पर्शी चित्रण किया है आपने. बात दिल को बींध गयी. लेकिन इन आतंकियों के पीछे छिपे आतंक को उजागर करने की कोशिश की मैंने.
आप सराहेंगी तो हमारी चेष्टा को बल मिलेगा, मार्गदर्शन करेंगी तो हमारे प्रयास को एक दिशा मिलेगी.

Neelesh K. Jain said...

inhe samjhane ki jaroorat hai

Jo raah
insaan kil aashon se hokar jayegi
woh bhala
kab, kahan aur kaise manzil payegi

saarthak lekhan ke liye saadhuvaad!
Neelesh

Ashok Sharma said...

Wah, laajawab rachna

ज्योति सिंह said...

कब इंसानियत की राह ये चलेंगे
कब ? कैसे ? खत्म होंगे इनके ये सितम ..
bahut sahi kah rahi aapki kalam
aadmi kab samjhega in baaton ko ,bahut sundar rachna

Anonymous said...

आतंकवाद का मुद्दा निश्चय बहुत गंभीर है जिसे आपने चित्रित करने का अच्छा प्रयास किया है

dipayan said...

काश आपके प्रशनो के उत्तर उनके पास भी होते जो आज इन्सानियत भूल गये हैं । हम सब यही उम्मीद करते हैं, जो मदहोश हैं आज हैवानियत में, वो कल होश मे आयेंगे ।

vishnu-luvingheart said...

bas dua hai ki is ummid me hum na khatam ho jaye...
humare khatam hone se pahle ye hi kahatm ho jaye....
aue ye sab kuch koi "Neta" nahi karega......
Aman se rahne ke kiye hume hi in sarpon ka daman karna hoga...

sm said...

excellent poem
every word says the truth
says everything

पूनम श्रीवास्तव said...

ये गफलत इन दरीन्दो की
ना जाने कब होगी ख़तम ?

कब इंसानियत की राह ये चलेंगे
कब ? कैसे ? खत्म होंगे इनके ये सितम ?

Bahut khoobasurat panktiyan----aur hamen hee ise khatm karane ke prayas karne honge.shubhakamnayen.
Poonam

amita said...

एक ही माँ के बेटे होकर आपस में दहेशत
मचाते हैं.
जब तक राम रहीम और इशु एक है
यह सोच नहीं आएगी तब तक इंसान हैवान
ही रहेगा