Saturday, September 5, 2009

अकुलाहट

मेरी बिटिया का
full term है चल रहा
अब ये समय सभीका
काटे
नही है कट रहा ।

डाक्टर ने दी है
दो सितम्बर की डेट
तब तक तो करना
ही है सभी को वेट ।

माँ और नानी बनने मे है
बहुत ही ज्यादा होता है फर्क ।
बेकार है इस को लेकर
करना किसी तरह का तर्क ।

"मूल से सूद प्यारा होता है "
ये बात अब मै भी जान गई ।
मेरी माँ की , नानी की छवि
अनायास मेरे सामने है आगई ।

लौरी ,कहानिया जो मै सुनाती थी
मेरी बेटियों को रातो मे कभी ।
अचेतन मे छिपी बैठी थी जो कही
उभर कर आगई ऊपर वे सभी ।

मन मे घुस आई है
बिना किये कोई आहट |
समय काटना मुश्किल हो गया
ये ही तो नहीं अकुलाहट ?

4 comments:

meenal said...

very well said.
apny man ki vaytha bahut sunder tariky say vayakt ki hai.

creativekona said...

लौरी ,कहानिया जो मै सुनाती थी
मेरी बेटियों को रातो मे कभी ।
अचेतन मे छिपी बैठी थी जो कही
उभर कर आगई ऊपर वे सभी ।

मन मे घुस आई है
बिना किये कोई आहट |
समय काटना मुश्किल हो गया
ये ही तो नहीं अकुलाहट ?

Bahut achchhee yadon kee khoobasurat abhivyakti.....kripaya word varification hata den to tppanee likhanii asan rahegee.
Hemant Kumar

Dr.Ashok said...

Yeh sub to theek hai,bahut achha hai, Result bhi to batao.
Waiting eagerly for the New Arrival news.

shruti said...

Bahut he acchi poem hai.....