Monday, April 25, 2011

आभास

एक माह बीता

आभास साथ है

जैसे कि तुम सब

देख और सुन रही

मेरी खिड़की

के हिस्से आए

मुट्ठी भर

आसमान पर

घनघोर अंधेरी

रात के

सीने को चीर

बदली की ओंट से

कल एक प्यारा

तारा झाँका था

उसकी चमक

चकाचोंध कर गयी

तुम कंही वो

ही तो नही ।

42 comments:

सदा said...

उसकी चमक
चकाचोंध कर गयी
तुम कंही वो
ही तो नही ।

भावमय करते शब्‍द ... ।

संजय भास्कर said...

सार्थक और बेहद खूबसूरत,प्रभावी,उम्दा रचना है..शुभकामनाएं।

संजय भास्कर said...

मुट्ठी भर

आसमान पर

घनघोर अंधेरी
रात के

सीने को चीर

बदली की ओंट से

..........सार्थक और भावप्रवण रचना।

SKT said...

वाह!...शाश्वत मौजूदगी का भावभीना एहसास!!

Parul said...

ek sundar aabhas...jo man ke kisi kone mein danba sa hai!

डॉ टी एस दराल said...

इस आभास में प्रेम का सुन्दर अहसास है ।
निर्मल अभिव्यक्ति ।

सतीश सक्सेना said...

कहीं न कहीं तो है जिस स्वरुप पर भरोसा हो जाए वही विराम ! शुभकामनायें !

दिलीप said...

dard ka meethapan jab kalam se chankar girta hai..to aankhein nam aur dil chahak sa uthta hai...bhavmay prastuti

kshama said...

Behad pyaree rachana hai!

ZEAL said...

A creation with soft feelings.

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

उसकी चमक
चकाचोंध कर गयी
तुम कंही वो
ही तो नही ।

कोमल भाव लिए संवेदनशील रचना ...

मनोज कुमार said...

भावपूरित रचना।

संजय @ मो सम कौन ? said...

वही हैं।

रचना दीक्षित said...

उसकी चमक
चकाचोंध कर गयी
तुम कंही वो
ही तो नही ।

एक आभास का सुंदर एहसास इस कबिता के माध्यम से होता है. बेहद खूबसूरत,प्रभावी,उम्दा रचना. बधाई.

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

तुम कहीं वो तो नहीं ... कितना प्यारा आभास

sm said...

beautiful
poem
are you not the one whom I am missing

अरुण चन्द्र रॉय said...

बेहतरीन कविता... शब्द भावविभोर कर रहे हैं...

Patali-The-Village said...

सार्थक और बेहद खूबसूरत रचना|

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

सरिता दी,
एक ही तारे में क्यों हर तारे और कायनात की हर शै में आप उनको मुस्कुराते हुए देख सकती हैं... बहुत प्यारा एहसास उनके लिए जो हमारे बीच न रहकर भी हर तरफ हैं, हर पल हैं.
(मेरी स्थिति में बहुत सुधार नहीं है)

ज्योति सिंह said...

उसकी चमक
चकाचोंध कर गयी
तुम कंही वो
ही तो नही ।
is khabar se anjaan rahi aapka dukh apna hi dukh jaan padta ,kya gujar rahi hogi iska ahsaas hai ,pahle aapka man kuchh sambhal jaaye .aapki saheli taare ke roop me aapko bahlaane aai rahi .

वाणी गीत said...

आभास भी कई बार साकार सा हो उठता है ...
भावपूर्ण प्रस्तुति !

kase kahun? said...

bahut sunder...

अमित श्रीवास्तव said...

JISE HAM BAHUT CHAAHTE HAIN VO AISE HI SAB JAGAH "CHAMAK" BAN DIKH JAYA KARTA HAI BAS..

Vivek Jain said...

सुंदर अहसास!

विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

Suman said...

bahut sunder ahasas.........
mere blog par ane ka shukriya.......

दिगम्बर नासवा said...

Gahra ehsaas hai is aabhaas mein bhi ...

प्रवीण पाण्डेय said...

भावुक करती रचना।

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

सुन्दर रचना। जो दिल में हों वही हर ओर चमकते हैं।

Bhushan said...

प्रेम भरा कोमल अहसास. बहुत सुंदर रचना.

Pradeep said...

सार्थक और बेहद खूबसूरत,प्रभावी,उम्दा रचना है..शुभकामनाएं।

कविता रावत said...

कल एक प्यारा

तारा झाँका था

उसकी चमक

चकाचोंध कर गयी

तुम कंही वो

ही तो नही ।
....bahut sukomal ahsas...

JHAROKHA said...

aadar niya di
bahut hi bhav purn v bahut hi pyaari si post .nisandeh aapne shayad apni pyaari si dost ke liye likhi hai ye sundar si man mohak rachnajinka saath hamesha hi ek yaad ke roop me rhega.is pyaari si dosti jo aapke dil me hamesha hi saath rahegi
bahut bahut naman
poonam

Deepak Saini said...

सुन्दर अभिव्यक्ति

सुशील बाकलीवाल said...

उत्तम कविता । इस क्षमा के साथ की कविता की मुझे विशेष समझ नहीं है ।

Apnatvaji (अपनत्वजी)

आपके जीजाजी डा. जे. के. बाकलीवाल मेरे सगे बडे भाई हैं और अपनी पोस्ट में मुझसे सम्बन्धित संस्मरण में डा. भाई सा. के रुप में उन्हीं का उल्लेख मेरे द्वारा किया गया है । अब आप कृपया अपना विस्तृत परिचय दें । धन्यवाद...

सुशील बाकलीवाल said...

बांदीकुई बहुत छोटी उम्र में इनकी शादी में पहली और आखिरी बार ही मेरा आना हुआ था । आपसे यूं मिलकर बहुत अच्छा लगा । वाकई दुनिया बहुत छोटी है ।

मदन शर्मा said...

पहली बार आपके ब्लॉग पर आया अच्छा लगा
भावनाओं का सुंदर शब्द चित्रण.....

मदन शर्मा said...

पहली बार आपके ब्लॉग पर आया अच्छा लगा
भावनाओं का सुंदर शब्द चित्रण.....

mridula pradhan said...

bhawbhini.......

विजय रंजन said...

मेरी खिड़की

के हिस्से आए

मुट्ठी भर

आसमान पर

घनघोर अंधेरी
रात के

सीने को चीर

बदली की ओंट से

कल एक प्यारा

तारा झाँका था

उसकी चमक

चकाचोंध कर गयी

तुम कंही वो

ही तो नही ।

Kavita bolti hai...bahut khoob bolti hai.

veerubhai said...

bahut sundar bimb yaad kaa sarovar saa ...
veerubhai .

Surendrashukla" Bhramar" said...

अपनत्व जी सुन्दर भाव भरी रचना दिल को छू लेने वाली
उसकी चमक
चकाचोंध कर गयी
तुम कंही वो
ही तो नही ।

धन्यवाद
शुक्ल्भ्रमर ५

ishq sultanpuri said...

behatareen pragativadi rachna...........aapako badhaee