Tuesday, April 19, 2011

झील

शैल !

जब भी

किसी से

तुम्हारा जिक्र

होता है

आँखे झील

बनती है

और फिर

यादे यँहा

तैरना शुरू

कर देती है

समय थम

सा जाता है

साथ बीता

हर पल तब

मेरे पास

यूं स्वयं

लौट आता है ।

37 comments:

रचना दीक्षित said...

"आँखे झील
बनती है
और फिर
यादे यँहा
तैरना शुरू
कर देती है"

यादों का सफर शब्दों के माध्यम से बहुत सुंदर बन पद है. बधाईयाँ.

Sunil Kumar said...

और फिर
यादे यँहा
तैरना शुरू
कर देती है"
यादों का झील में तैरना वाह क्या बात है सुन्दर और प्रशंसनीय अभिव्यक्ति , बधाई ...

Kunal Verma said...

बहुत ही बढिया

sm said...

beautiful lines
like the flow of words

डॉ टी एस दराल said...

यादों में ऑंखें झील सी बन जाती हैं ।
सुन्दर अहसास ।

ZEAL said...

Beautiful and touching creation !

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूबसूरत एहसास ...शैल किसका नाम है ?

सतीश सक्सेना said...

यादें भुलाई नहीं जा सकतीं ....शुभकामनायें !

संजय भास्कर said...

वाह... उत्कृष्ट, भावपूर्ण रचना के लिए बहुत बहुत आभार।

संजय भास्कर said...

कई दिनों व्यस्त होने के कारण  ब्लॉग पर नहीं आ सका
... ....माफी चाहता हूँ..

संजय भास्कर said...

कई दिनों व्यस्त होने के कारण  ब्लॉग पर नहीं आ सका
... ....माफी चाहता हूँ..

Mukesh Kumar Sinha said...

yaado me sajana achchha lagta hai...hai na!!

दिगम्बर नासवा said...

यादें ... यादें .. सुहाना कर देती हैं हर सफ़र ...

Parul said...

yahi to jindagi ka falsfa hai!

सदा said...

खूबसूरत शब्‍दों में उतरी यह यादें ... लाजवाब ।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर और भावप्रणव रचना!

संजय @ मो सम कौन ? said...

अपनों को भुलाना सहज नहीं होता। समय ही इसका उपाय भी है और उपचार भी। शैलजी के अधूरे सपनों को पूरा करने में व्यस्त रहें आप।

प्रवीण पाण्डेय said...

नयन-जल में उतराता यादों का सैलाब।

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

इस पर कुछ भी कहना उन भावनाओं को हल्का करने जैसा होगा.. दीदी, आपने हमेशा मुझे हौसला दिया है..आपकी पोस्ट भी हौसला बंधाती हैं... छोटा हूँ कहने के लिए कि संभालिए खुद को!!

ज्योति सिंह said...

"आँखे झील
बनती है
और फिर
यादे यँहा
तैरना शुरू
कर देती है"
aapki rachna bahut sundar lagi

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

"आँखे झील
बनती है
और फिर
यादे यँहा
तैरना शुरू
कर देती है"
बहुत सुंदर ...गहन अभिव्यक्ति

योगेन्द्र मौदगिल said...

wah... behtreen bhavbodh....sadhuwaad..

JHAROKHA said...

aadarniya di
aapki rachne ke ek ek shabd jo ki haqikat hain man ko bhigo gaye sach hai jise ham apni saans ke saath juda hua mahsus karte hain jab vah apne aap se juda hota hai to dil me kitna dard hota hai mai bhi apne mata pita ji v bade bahiya ko kho chuki hun .mah ki har us tarrikh me unki yaad me aankhe bheeng jaati hai .vaise to unki yaade hameshha ke liye jab tak saans hai judi hi rahengi.
main aapke dard ko bahut hi dil se masus kar rahi hun.bas chhoti hun isliyr itna hi kah sakti haun ki housla banaaye rakhiye
sadar pranaam
poonam

दर्शन लाल बवेजा said...

सुन्दर कविता, मन को भा गयी।

सारा सच said...

अच्छे है आपके विचार, ओरो के ब्लॉग को follow करके या कमेन्ट देकर उनका होसला बढाए ....

Bhushan said...

बहुत सुंदर पंक्तियाँ. हृदय को छू लेने वाली रचना.

mridula pradhan said...

bhawbhini.......khoobsurat.

Kunwar Kusumesh said...

beautifully written.

: केवल राम : said...

सुंदर भावाभिव्यक्ति

अमित श्रीवास्तव said...

भावनाओं को उद्वेलित करती रचना .....

निवेदिता said...

यादें ही तो जिन्दा रखती है ....आभार !

ज्योति सिंह said...

aapko dekhi nahi apne blog par kai dino aap kaisi hai ?

संजय भास्कर said...

................खामोश रही तू.....संजय भास्कर .
नई पोस्ट पर आपका स्वागत है
धन्यवाद
http://sanjaybhaskar.blogspot.com/2011/04/blog-post_29.html

neelam chand sankhla said...

yadon ko sahazta se banyan karti kavita.sunder.

yadon ke bare men mere blog se-

aaz yad kya aai unkee
kabr se uth kar aansu bahane lage .

www.nature7speaks.blogspot.com

Richa P Madhwani said...

internet par hindi blogs padker bahut khushi hui

Shail said...

bahut sunder, par hai kis humnaam ke naam.?

Roshi said...

sabhi rachnayein dekhi bahut hi sunder.......