Thursday, September 23, 2010

पारंगत

हम कमर कस कर

हो रहे है अब तैयार

सफाई करने १२०० की

फौज करली तैयार

लीपा पोती मे हम

है कितने माहिर

पारंगत इस कला में

होगा अब जग जाहिर ।












33 comments:

kshama said...

Hamari band mutthee to kabkee khul chukee hai...ab kya hona hai!

मनोज कुमार said...

आज कल आपके चुटीले व्यंग्य रास आ रहे हैं। बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
आभार, आंच पर विशेष प्रस्तुति, आचार्य परशुराम राय, द्वारा “मनोज” पर, पधारिए!

अलाउद्दीन के शासनकाल में सस्‍ता भारत-2, राजभाषा हिन्दी पर मनोज कुमार की प्रस्तुति, पधारें

संजय भास्कर said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति

Bhushan said...

जिन लोगों की आपने चुटकी ली है उन्हें दर्द नहीं होता केवल गुदगुदी होती है. अच्छी प्रस्तुति.

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सटीक बात

दिगम्बर नासवा said...

सच कहा है ..... मेरा भारत महान .....

सम्वेदना के स्वर said...

आप लीपा पोती की बात कर रही हैं..हमने तो सी.आई.डी. रिपोर्ट लगा रखी है...मौक़ा मिले तो देखें..

रचना दीक्षित said...

अच्छा है करार लगा

राजभाषा हिंदी said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति। राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।
मशीन अनुवाद का विस्तार!, “राजभाषा हिन्दी” पर रेखा श्रीवास्तव की प्रस्तुति, पधारें

Babli said...

बहुत सुन्दर और सठिक बात लिखा है आपने! बेहतरीन प्रस्तुती!
मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://www.seawave-babli.blogspot.com/
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

अरुणेश मिश्र said...

उपयुक्त ।

BrijmohanShrivastava said...

ek bahur umda vyangya

JHAROKHA said...

Bahuta hee sahi aur atik kavita ---samayik.

ज्योति सिंह said...

baat uchit hai .

वाणी गीत said...

जिन्हें शर्मिंदा होना चाहिए , उनके चेहरे पर शिकत तक नहीं ...
व्यंग्य में अजब पीड़ा भी छिपी है ..!

वीना said...

बहुत सही...

ZEAL said...

rahiman chup ho baithiye , dekh dinan ke pher ....

mridula pradhan said...

very good.

Avinash Chandra said...

satya vachan

Udan Tashtari said...

बहुत सटीक!

रंजना said...

वाह...बहुत सटीक ...

कविता रावत said...

बहुत सटीक प्रस्तुति

स्वप्निल कुमार 'आतिश' said...

aaj kal jo ho raha hai uspe sahi kaha aapne ...samyik

sm said...

yes we should get Oscar in this.
like the poem
KALMADI WHAT YOU DID

boletobindas said...

हाहाहाहाहहा..सही कह रही हैं आप। लीपापोती मैं एक्सपर्ट हैं हम लोग। अगले महीने देखिएगा ऐसी लिपापोती होगी कि पूछिए नहीं। क्लीन चिट का एक नया दौर औऱ बकरी का शिकार होने वाला है। भले ही बकरी भी सियार हो गया होगा।

Bhushan said...

निरत पर आप पधारीं. धन्यवाद. मेघ वंदना पोस्ट एक अन्य ब्लॉग के लिए थी. गलती से लग गई थी. हटानी पड़ी. उसके लिए क्षमा.

शोभना चौरे said...

बढ़िया
मै शायद जनवरी में बेगलोर आउंगी आपको जरुर सूचित करुँगी |
धन्यवाद

arun c roy said...

करारा व्यन्ग!

सत्यप्रकाश पाण्डेय said...

अच्छी प्रस्तुति

यहाँ भी पधारें:-
ईदगाह कहानी समीक्षा

Shekhar Suman said...

bahut hi sundar prastuti..

sada said...

बहुत ही सुन्‍दर शब्‍द, गहरे भावों के साथ सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

शरद कोकास said...

इस 1200 का जवाब नही

अशोक मिश्र said...

आप के चुटीले व्यंग्य कथ्य बहुत अच्छे है ....
धन्यवाद....
http://nithallekimazlis.blogspot.com/