Saturday, May 8, 2010

पहेली

जो भाग्य को

सर्वोपरी मानते है

और हालात से

जूझते नहीं

वे जीवन को

पहेली तो मानते है

पर उसे कदापि

बूझते नहीं ।

20 comments:

kshama said...

Paheli chahe anbujh ho,jeeven se jhoojna to zaroori hai..zindageeke anubhav se upje alfaaz hain aapke..

सतीश सक्सेना said...

ऐसे लोग अपने साथ और अपनों के साथ अन्याय ही करते हैं ! हताशा के साथ भी क्या जीना !

sangeeta swarup said...

सही है.....भले ही जिंदगी पहेली हो बुझाने की कोशिश तो करनी पड़ती है....

मैंने कभी लिखा था....

जिंदगी-
एक ऐसी पहेली
जो बूझते बूझते
खत्म हो जाती है
पर -
उत्तर नहीं मिलता

दिलीप said...

ekdam satya vachan

anjana said...

बिल्कुल सही कहा आप ने..

अरुणेश मिश्र said...

सत्य कथन ।

nilesh mathur said...

वाह! बहुत ही कम शब्दों में आप अपनी बात कह जाती हैं!

sm said...

there is nothing like luck its foolishness

Babli said...

आपने सही कहा है ! मैं तो यही मानती हूँ कि ज़िन्दगी के हर पल ख़ुशी से जीना चाहिए! उम्दा प्रस्तुती!

मनोज कुमार said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति।
इसे 09.05.10 की चर्चा मंच (सुबह 06 बजे) में शामिल किया गया है।
http://charchamanch.blogspot.com/

dipayan said...

सच को आईना दिखा दिया आपने । कम शब्दो मे बेहतरीन रचना ।

SAMVEDANA KE SWAR said...

भाग्य को सर्वोपरि मान बैठा मैकबेथ जीवन की पहेली बूझना तो दूर, उसमें ऐसा उलझता चला गया कि जीवन ने उसका साथ छोड़ दिया... आज आपकी कविता ने पुनः सिद्ध कर दिया कि परिस्थितियों से जूझे बिना जीवन की पहेली का हल सम्भव नहीं...आपके चरणों में हमारा सस्नेह वंदन!!!

Anonymous said...

Very nice poem aunnie...ab to aap century holder hain...its showing up in your writings...aapki kavitaayein...more simple and more philosophical ho gayi hain...good to read specially becos these days newspaper and other public literature is full of negativity both in politics and community....hardly any take home message...aap aisi hee sundar kavitayaan likh kar subkey munn ko prafullit karein issi aasha key saath "Happy Mothers Day" with love Aabha

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

हिंदू दर्शन में नियति और पौरुष दोनों की बात कही गई है ... पर आज हम पौरुष को भूल कर केवल नियति को ही याद रख पाए हैं ...

दिगम्बर नासवा said...

सच है ... हालात को स्वीकार करना और मेहनत करना ही रास्ता है ...

ज्योति सिंह said...

आपकी रचना हर बार नई सोच लिये सामने आती है ,तबियत सही है सफ़र मे व्यस्त हू ,अभी १४ को रायपुर जा रही हू ,जून मे मिलती हू .

vishnu-luvingheart said...

satya ko bade hi pyare dhang se piroya hai aapne...
bhadhai!!!

रश्मि प्रभा... said...

ped ke niche leta murakh aam aam chillaye, lekin daal talak jo pahunche, aam usine khaye

ज्योति सिंह said...

aapki 'meri dadi'wali post nahi khul rahi ,phir koshish karungi

करण समस्तीपुरी said...

शाश्वत सत्य की सहज और सुन्दर अभिव्यक्ति. बहुत बढ़िया....... धन्यवाद !!!