Friday, August 26, 2011

गिरगिट

गिरगिट है

या सरकार

बताने की

नहीं दरकार ।

31 comments:

Bharat Bhushan said...

सरकार के बदलते रंगों को देखते-देखते मुझे लगने लगा है कि मैं खुद एक गिरगिट हूँ और कि गिरगिट एक स्वच्छ प्राणी है जो किसी भी रंग में मिल जाता है या कोई भी रंग उसमें मिल जाता है. :))

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

इस रंग बिरंगी दुनिया में रंग बिरंगे वक्तव्य देती सरकार.. गिरगिट भी शर्मा जाए..
बहुत अच्छा कहा सरिता दी!!
आखिर आपको भी राज्नैक्तिक विषय पर कहना पड़ ही गया!!

vidhya said...

bahut sundar

संजय @ मो सम कौन... said...

मंजूर है जनता जनार्दन की फ़टकार,
गर मिलता रहे मैडम से पुचकार।

रेखा said...

सरकार नहीं है ...गिरगिट ही लगती है

सदा said...

वाह बहुत खूब ... ।

यशवन्त माथुर (Yashwant Raj Bali Mathur) said...

बहुत सही लिखा आपने।

सादर

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

बढिया.. क्या बात है

Anonymous said...

सही आकलन

रश्मि प्रभा... said...

ker diya chand shabdon me khulasa

ज्योति सिंह said...

aaj to netao me aesi bahas chhidi ki soch me padh gayi news dekhkar ,kya hoga is desh na na jaane ,aapki rachna sahi sanket de rahi hai .sundar sarita ji .

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

चंद शब्द और सरकार का पूरा खाका खींच दिया ..बहुत अच्छी प्रस्तुति

kshama said...

Behad achha kaha!

Rakesh Kumar said...

आप गिरगिट का नाम यूँ न बदनाम कीजियेगा ,प्लीज.

सरकार तो वह है जो सबके सर पर अपनी कार दौडाए.

आभार.

समय मिलने पर मेरे ब्लॉग पर आईयेगा.

मनोज कुमार said...

भेड़िया हो या सियार
गिरगिट का है यार!

Kunwar Kusumesh said...

बहुत खूब.

शूरवीर रावत said...

" देख तेरे संसार की सूरत क्या हो गयी भगवान, कितना बदल गया इन्सान.....?

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

सुन्दर प्रस्तुति

Unknown said...

सटीक रचना....

S.N SHUKLA said...

सशक्त सार्थक और खूबसूरत प्रस्तुति .

virendra said...

बहुत सुन्दर खूबसूरत प्रस्तुति .

दिगम्बर नासवा said...

सच कहा है ... ये बताने की जरूरत नहीं है आज ... जय हो अन्ना की रंग बता दिया सरकार का ...

Bharat Bhushan said...

जन लोकपाल के पहले चरण की सफलता पर बधाई.

महेन्‍द्र वर्मा said...

गिरगिट और सरकार,
अच्छी तुलना है।

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...

बढ़िया लिखा है आदरणीया सरिता जी !
प्रणाम !
गिरगिट को भी शर्म आ रही होगी इस सरकार के काले-कुत्सित रंगों को देख कर …
बहुत बधाई !

भ्रष्टाचारियों और तानाशाहों से मुक्ति पाने के लिए
अब लगातार यह याद रखना है , और संपर्क में आने वाले हर शख़्स को निरंतर याद दिलाते रहना है , प्रेरित करते रहना है कि चुनाव के वक़्त सही आदमी को वोट देना है …
और मतदान आवश्यक कार्य मानते हुए पूरे दायित्व तथा समझ के साथ सही व्यक्ति/सही पार्टी को वोट देना है !

Parul kanani said...

100 AANE sach keha :)

मनोज भारती said...

गिरगिट भी शर्म से चूर हुई जाती है
देख कर इस इस सरकार के रंग
पर हमारी सरकार को नहीं है कोई दरकार
कि उसे कितना है हमसे सरोकार

mridula pradhan said...

ekdam theek.....

amrendra "amar" said...

वाह बहुत खूब ।बहुत अच्छी प्रस्तुति

सहज समाधि आश्रम said...

very nice post

Satish Saxena said...

काफी दिन से कुछ लिखा नहीं आपने ....??
शुभकामनायें आपके लिए !