Sunday, August 21, 2011

मेरी दादी

मेरी दादी का स्वर्गवास हुए तकरीबन पचास साल होने को है पर उनके व्यक्तित्व ने अमिट छाप छोडी है मुझ पर । मेरी दादी कितनी पढी लिखी थी पता नहीं हाँ जैनधर्म के कई पाठ जो संस्कृत मे थे वे उन्हें कंटस्थ थे और वो मंदिर मे अर्थ सहित उनकी व्याख्या कर अन्य साथी दर्शनाभिलाषी आई महिलाओं को सुनाती थी । और बात बात पर मुहावरे और कहावतों का उपयोग करना उनके बाँये हाथ का खेल था । :)
अरे वाह मैंने भी मुहावरा इस्तेमाल किया ...........हूँ भी तो उन्ही की पोती ।
आजकल जो वर्तमान स्थिती चल रही है उससे अवगत सभी है । पूरे देश मे हलचल मची है पर ऐसे मे भी सरकार का रूखा रवैया गैर जिम्मेदाराना लग रहा है ।
आज फिर दादी की याद आ गयी ।
मेरे दिमाग मे आ रहा था कि आज अगर दादी होती तो आज के हालात के सन्दर्भ मे वे क्या कहती कौनसा मुहावरा इस्तेमाल करती सरकार के लिये ?
घोड़े बेच कर सोना ( शायद नहीं )
या
कानो पर जूं तक नहीं रेंगना ( शायद उपयुक्त )
हम अब बस अनुमान ही लगा सकते है ...........

25 comments:

सतीश सक्सेना said...

शुभकामनायें देश और आपके लिए !

रेखा said...

दूसरा ज्यादा उपयुक्त है

प्रवीण पाण्डेय said...

देश के लिये निष्कर्ष सुखद हों।

दिगम्बर नासवा said...

देश के हालात शोचनीय हैं ... अब तो मुहावरे भी कम पढ़ जायेंगे सरकार की बेशर्मी पे ..

Bhushan said...

दोनों सही लग रहे हैं बारी-बारी से :))

मनोज कुमार said...

बहुत सुंदर संदेश।

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

सरिता दी,
आदरणीया दादी जी के स्मरण एवं उनके चरण-स्पर्श के उपरांत इस वक्तव्य पर यही कहना चाहूँगा कि वर्त्तमान परिस्थितियों ने नए मुहावरे गढे हैं.
आपने इस विषय पर अपनी सोच व्यक्त की, यही हमारे लिए एक सुखद आश्चर्य है!!

वन्दना said...

दूसरा कहतीं।
आप को कृष्ण जन्माष्टमी की बहुत बहुत शुभकामनायें

kshama said...

Aapne to mujhe meree Dadi kee yaad dila dee!

रचना दीक्षित said...

देश और सरकार दोनों के लिए दोनों ही अपनी अपनी जगह उपुक्त हैं

डॉ टी एस दराल said...

इस वक्त देश को मुहावरों के साथ कुछ ठोस निर्णय लेने की भी ज़रुरत है ।
जन्माष्टमी की शुभकामनायें ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

दादी कहतीं कि -- सरकार घोड़े बेच कर सो रही है ..यहाँ तक कि उसके कान पर जूं भी नहीं रेंगती ...

जन्माष्टमी की शुभकामनाएँ

mridula pradhan said...

dadi ki yadon ko naman.

kumar said...

इतनी घटिया सरकार पर मुझे भी एक मुहाबरा याद आ रहा है....

नींचन के नहीं पर गिने,नींचन के नहीं गांम
नीच उसी को जानिये,जो करे नींच के काम

रश्मि प्रभा... said...

bas anumaan hi hai her taraf

संजय @ मो सम कौन ? said...

संगीता स्वरूप जी का अनुमान सही लगता है।

सुबीर रावत said...

इन नेताओं पर चाहे कितने मुहावरे गढ़ लो पर ये निल्लर्ज, बेशर्म, बेहया ही-ही ही-ही कर दांत निपोरेंगे, बस !

संजय भास्कर said...

बहुत सुंदर संदेश।

सदा said...

बिल्‍कुल सही ... प्रेरक संदेश ..आभार ।

ज्योति सिंह said...

bade bujurago ke anubhav hamare bahut kaam aate hai ,koshish safal ho ,desh ka uddhar ho ,jai hind .

अभिषेक मिश्र said...

दादी जी अपने अनुभवों के संग्रह से कोई अनूठी ही प्रतिक्रिया लेकर आतीं. बुजुर्गों की अनुभवजनित प्रतिक्रिया काफी सटीक होती है.

रचना दीक्षित said...

अब तो इंतिहा हो गयी इन्तेज़ार की. भगवान इन सबको सद्बुद्धि दे, सन्मति दे.

देवेन्द्र पाण्डेय said...

कानों पर जूं नहीं...खोपड़ी पर भैस दुलत्ती मार रहा है। नींद उड़ चुकी है सरकार की।

Dr. shyam gupta said...

ज्ञान के लिए स्कूल-कालिज में पढना आवश्यक थोड़े ही है...कबीर , तुलसी किस स्कूल में पढ़े थे....

---सुंदर विचार व स्मृति के लिए बधाई ...

sangeeta said...

Brsharmi ke sabhi muhavre kam pad jayenge Sarita ji....

How have you been? Long time i didn't get to read any blogs...you reminded me of my own daadi :)