Tuesday, October 6, 2009

संतुलन

भीगी अनुभूति
भीगे एहसास
जब भी माहौल को
पूरे तौर से
भिगा जाते है
और यों दिलो मे
सभी की ठंडक
पैदाकर जाते है ।
आत्मीयता मे
सने , लिपटे
मेरे तपते दबे जज्वात
गर्माहट देने
न जाने किस कौने से
ऊपर उठे चले आते है
और यों माहौल मे
संतुलन बना जाते है ।

22 comments:

anjugandhi said...

please teach me how to write in such poetic manner. kuch shabdo mein bahut jyada kehna aapko bakhubi aatta hai

रश्मि प्रभा... said...

atmiyta me dube aapke ehsaas kamal ke hain, bahut khoobsurat santulan

sangeeta said...

kaash yun hi santulan bana rahe....khoobsurat ehsaas.....badhai

Swatantra said...

It is tough to make the balance, we are trying for the same in life!! Nice poem as always!!

Manoj Bharti said...

अहसास, अनुभूतियों की ठंडक और गर्माहट के बीच संतुलन रहे तो जीवन सार्थक हो जाता है ।

बहुत खूब !!!! सुंदर

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

सुंदर भाव।
करवाचौथ और दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।
----------
बोटी-बोटी जिस्म नुचवाना कैसा लगता होगा?

Apanatva said...

आप सभी का यंहाहार्दिक स्वागत !

Harkirat Haqeer said...

आत्मीयता मे
सने , लिपटे
मेरे तपते दबे जज्वात
गर्माहट देने
न जाने किस कौने से
ऊपर उठे चले आते है
और यों माहौल मे
संतुलन बना जाते है ।

आपके ज़ज्बात अछे लगे ....!!

Neha said...

amazing one...

शोभना चौरे said...

santuln se hi nav par lgti hai aur jeevan kinaiya bhi santulan se par lgti hai .
bahut bdhiya abhivykti.
abhar

sm said...

nice poem, balance is very imp in life.

Aparna said...

Isn't nature all about balance too? Still we never seem to learn from it.
Nice lines as always.

JHAROKHA said...

बहुत कोमल एहससों की खूबसुरत अभिव्यक्ति।
पूनम

नीरज गोस्वामी said...

बहुत ही अच्छी रचना...आपकी लेखन शैली उत्कृष्ट है...
नीरज

Babli said...

बहुत ही सुंदर भाव और अभिव्यक्ति के साथ लिखी हुई आपकी ये रचना प्रशंग्सनीय है!

shruti said...

aatmiyta se bhare hue ehsaas hame hamesha he yaad rehte hai aur saath he unki yaadein hame khush hone ka ek naya bahana deti hai...
bahut bahut acchi hai!
waiting for your new poem...

sm said...

again such a meaningful poem
great

दिगम्बर नासवा said...

खूबसूरत हैं आपके जज्बात ......... सच में कोई कोई अनुभूति पूर्ण रूप से संतुलित कर जाती है . सुन्दर रचना है .....

संजय भास्कर said...

कम शब्दों में बहुत सुन्दर कविता।

sangeeta said...

आपके भीगे एहसास मुझे भी भीगा जाते हैं अक्सर , आपकी सुन्दर फोटो देखकर अच्छा लगा !
इतने अच्छे हिंदी ब्लॉग देख कर मेरा मन भी कर जाता है हिंदी में लिखने का , अपनी दादी कि कहानिया जो वो सोते समय सुनाती थी उन्हें संकलित करने कि इच्छा है...देखती हू कब पूरी हो पाती है!

Neha said...

wish u a very happy Diwali...hope u have had a nice one :)

Apanatva said...

आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद .