कल्पना की नींव
पर बना महल भी
महज़ एक हवा के
झोंके से, उड़ सकता है ।
पर यथार्थ की नींव
पर बनी, एक झोपडी
तूफ़ान से भी टक्कर
लेने का हौसला रखती है ।
Thursday, August 13, 2009
Wednesday, August 12, 2009
मिसाल
बहुत व्यस्त होते हुए भी जो
सभी का रखते है पूरा ध्यान |
ये ही वजह तो नही कि अपनो के
बसते ऐसे व्यक्ति मे प्राण |
सभी के हितों को लेकर चलने वाला
बन ही जाता है सब के लिए एक मिसाल ।
ऐसे व्यक्ति से अगर आप जुड़े हो
अवश्य ही महसूस करेंगे स्वयं को निहाल ।
सभी के हितों को लेकर चलने वाला
बन ही जाता है सब के लिए एक मिसाल ।
ऐसे व्यक्ति से अगर आप जुड़े हो
अवश्य ही महसूस करेंगे स्वयं को निहाल ।
Sunday, August 9, 2009
दुविधा
एक तरफ़ हो कुँआ
दूसरी तरफ़ खाई ।
लाख शुक्र है ईश्वर का
ये स्थिती मेरे जीवन में
आज तक कभी नही आई । ।
पर मैंने इस दुविधा में
लोगो को झूलते है देखा ।
मिटा नही सकता
कोई भाग्य का लिखा लेखा । ।
ऐसे में मुश्किल हो
आसानी से कोई
भी निर्णय लेना ।
बस ये ही प्रार्थना
कर सकते है कि सबको
भगवन सत्बुद्धी देना । ।
दूसरी तरफ़ खाई ।
लाख शुक्र है ईश्वर का
ये स्थिती मेरे जीवन में
आज तक कभी नही आई । ।
पर मैंने इस दुविधा में
लोगो को झूलते है देखा ।
मिटा नही सकता
कोई भाग्य का लिखा लेखा । ।
ऐसे में मुश्किल हो
आसानी से कोई
भी निर्णय लेना ।
बस ये ही प्रार्थना
कर सकते है कि सबको
भगवन सत्बुद्धी देना । ।
Wednesday, August 5, 2009
वादा
इन्होने कभी किया था
मुझसे कोई वादा ।
याद दिलाया तो जवाब
दिया था सीधा -सादा । ।
तुम्हारा कोई सपना
नही रहेगा अधूरा ।
थोड़ा समय दो सब
करूँगा मै जरूर पूरा ।।
एक बात तो है व्यक्तित्व मे
मैंने हमेशा ही दिल से मानी ।
होकर रहता है वही जीवन मे
एक वार जो है इन्होने ठानी ।।
जो चाहो तुंरत मिले तो
आए वो मज़ा भी नहीं ।।
कुछ तरसे, इंतजार करे
फिर मिले तो क़द्र होती है, सही ।।
मुझसे कोई वादा ।
याद दिलाया तो जवाब
दिया था सीधा -सादा । ।
तुम्हारा कोई सपना
नही रहेगा अधूरा ।
थोड़ा समय दो सब
करूँगा मै जरूर पूरा ।।
एक बात तो है व्यक्तित्व मे
मैंने हमेशा ही दिल से मानी ।
होकर रहता है वही जीवन मे
एक वार जो है इन्होने ठानी ।।
जो चाहो तुंरत मिले तो
आए वो मज़ा भी नहीं ।।
कुछ तरसे, इंतजार करे
फिर मिले तो क़द्र होती है, सही ।।
Saturday, August 1, 2009
प्रतीक्षा
प्रतीक्षा,ये भी अपने आप मे
एक अनूठा सा अनुभव है ।
कौतुहल ,बेचैनी ,उत्सुकता
इन सभी भावों का संगम है ।।
मेरे जीवन मे भी आकर
इसने डेरा जमा है डाला ।
समय काटे नही कट रहा
लाख यतन कर डाला ।।
रोज़ ही बिटिया से बात होती
फिर भी संतोष नही ।
हर माँ का दिल ऐसा होता है
मेरा भी कोई दोष नही ।।
सब्र का फल मीठा होता है ।
कह गए बड़े -बूडे और ज्ञानी ।
पर ममतावश मजबूर हूँ
कहावत से नही, मै भी अनजानी । ।
मन को बहुत प्यार से समझाया तो है
कुछ सप्ताह की ही तो अब है बात ।
मान गया तो अच्छा ही है
वरना जैसा रखेगा , रहेंगे इसके साथ । ।
एक अनूठा सा अनुभव है ।
कौतुहल ,बेचैनी ,उत्सुकता
इन सभी भावों का संगम है ।।
मेरे जीवन मे भी आकर
इसने डेरा जमा है डाला ।
समय काटे नही कट रहा
लाख यतन कर डाला ।।
रोज़ ही बिटिया से बात होती
फिर भी संतोष नही ।
हर माँ का दिल ऐसा होता है
मेरा भी कोई दोष नही ।।
सब्र का फल मीठा होता है ।
कह गए बड़े -बूडे और ज्ञानी ।
पर ममतावश मजबूर हूँ
कहावत से नही, मै भी अनजानी । ।
मन को बहुत प्यार से समझाया तो है
कुछ सप्ताह की ही तो अब है बात ।
मान गया तो अच्छा ही है
वरना जैसा रखेगा , रहेंगे इसके साथ । ।
Tuesday, July 28, 2009
पूनम
सावन की जो पूनम है
उसकी तो है अनोखी बात ।
रक्षा -बंधन जो आता है
सदैव इसके साथ ।
मुझे वैसे , हर पूनम पसंद है
छिटकती है जो चांदनी
खुल के उस रात ।
काश ! कुछ उजाला
समेट,सहेज रख पाती
वो काम तब आता
होती जब अमावस की रात ।
उसकी तो है अनोखी बात ।
रक्षा -बंधन जो आता है
सदैव इसके साथ ।
मुझे वैसे , हर पूनम पसंद है
छिटकती है जो चांदनी
खुल के उस रात ।
काश ! कुछ उजाला
समेट,सहेज रख पाती
वो काम तब आता
होती जब अमावस की रात ।
Monday, July 27, 2009
मन
मेरा मन ,कल्पना के
घोड़े पर हो सवार
सभी अपनों के पास
अक्सर ही हो आता है ।
उसका यूँ भटकना
सबकी खोज -ख़बर
समय -समय पर लेना
बहुत अच्छा लगता है।
उसका ये लगाव ही तो
मुझे सबसे जोड़े रखता है ।
घोड़े पर हो सवार
सभी अपनों के पास
अक्सर ही हो आता है ।
उसका यूँ भटकना
सबकी खोज -ख़बर
समय -समय पर लेना
बहुत अच्छा लगता है।
उसका ये लगाव ही तो
मुझे सबसे जोड़े रखता है ।
Saturday, July 25, 2009
आप -बीती
एक दिन अचानक ही
सब कुछ था बदल गया ।
जो पास था वो दूर -
और दूर का पास आ गया ।
अरे ! हिलने लगी धरा
कभी लगा, धंसने लगी ।
आकाश भी झुकने लगा
कल्पना सी लगने लगी ।
फिर डॉक्टर को जा दिखाया
vertigo है ,ऐसा उन्होंने बताया।
vertin गोली लेने का सुझाव दिया
साथ ही ऊचा देखने व झुकने से मना किया।
vertigo में उठते -बैठते
चक्कर से आ जाते है ।
जानते है कि धरती नही हिलती
पर कदम डगमगा जाते है ।
संतुलन खोने का डर
ऐसे मे हमेशा बना रहता है ।
हाथ पकड़ कर चलना
आगे बड़ने मे सहायक होता है ।
इसी से ,जब भी बाहर जाने
की होती थी बात ।
अवश्य ही कोई न कोई
होता ही था मेरे साथ ।
कभी ख़राब समय आ जाता है
जीवन में, आता है तो आए ।
दिल चाहता है ,पड़ाव न डाले यंहा
हवा के झोंके सा ,उड़ जाए ।
vertin गोली ने कमाल कर दिया
अब तो सब ठीक ही चल रहा है।
स्वास्थ्य को ले, रहना है सदैव सजग
आख़िर vertigo से सीख लिया है।
सब कुछ था बदल गया ।
जो पास था वो दूर -
और दूर का पास आ गया ।
अरे ! हिलने लगी धरा
कभी लगा, धंसने लगी ।
आकाश भी झुकने लगा
कल्पना सी लगने लगी ।
फिर डॉक्टर को जा दिखाया
vertigo है ,ऐसा उन्होंने बताया।
vertin गोली लेने का सुझाव दिया
साथ ही ऊचा देखने व झुकने से मना किया।
vertigo में उठते -बैठते
चक्कर से आ जाते है ।
जानते है कि धरती नही हिलती
पर कदम डगमगा जाते है ।
संतुलन खोने का डर
ऐसे मे हमेशा बना रहता है ।
हाथ पकड़ कर चलना
आगे बड़ने मे सहायक होता है ।
इसी से ,जब भी बाहर जाने
की होती थी बात ।
अवश्य ही कोई न कोई
होता ही था मेरे साथ ।
कभी ख़राब समय आ जाता है
जीवन में, आता है तो आए ।
दिल चाहता है ,पड़ाव न डाले यंहा
हवा के झोंके सा ,उड़ जाए ।
vertin गोली ने कमाल कर दिया
अब तो सब ठीक ही चल रहा है।
स्वास्थ्य को ले, रहना है सदैव सजग
आख़िर vertigo से सीख लिया है।
Tuesday, July 21, 2009
कभी-कभी
कभी -कभी
हम तो स्थिर होते है
पर मन भटके चारों ओर ।
एक जगह न रुके
जैसे मिल न रही कहीं ठौर ।
हम चाहते कुछ है
हो जाता है कुछ और ।
संयम रखना ठीक रहेगा
व्यर्थ है मचाना शोर ।
कभी -कभी
जब गर्दिश में
होते है तारे।
सभी यत्न बेकार
होते हमारे ।
हताश होने की
नही कोई वजह।
याद रहे हर रात की
होती ही है सुबह ।
कभी -कभी
उलझनों से जब हम
घिर जाते है ।
और सही मार्ग स्वयं
खोज नही पाते है ।
उचित रहेगा कि -
स्वजनों से हम ले सलाह
उनके अनुभव हमें
सही राह बता जाते है ।
हम तो स्थिर होते है
पर मन भटके चारों ओर ।
एक जगह न रुके
जैसे मिल न रही कहीं ठौर ।
हम चाहते कुछ है
हो जाता है कुछ और ।
संयम रखना ठीक रहेगा
व्यर्थ है मचाना शोर ।
कभी -कभी
जब गर्दिश में
होते है तारे।
सभी यत्न बेकार
होते हमारे ।
हताश होने की
नही कोई वजह।
याद रहे हर रात की
होती ही है सुबह ।
कभी -कभी
उलझनों से जब हम
घिर जाते है ।
और सही मार्ग स्वयं
खोज नही पाते है ।
उचित रहेगा कि -
स्वजनों से हम ले सलाह
उनके अनुभव हमें
सही राह बता जाते है ।
Sunday, July 19, 2009
अकेलापन
ये किसी को काटता है
तो किसी को कचोटता है ।
कोई इससे बोर होता है
तो किसी को ये उदासीन करता है ।
किसी का समय कटना दुभर करता है
तो किसी को उसकी, अप्रियता का आभास कराता है ।
कई वार यंहा तक होता है कि -
आप सबके साथ होते है तब भी ,ये आपके साथ होता है।
सबसे आपके विचार नही मिलते है
इसीसे, इसका आभास होता है ।
खुश रहिये कि सब का साथ है आपको मिला
विचार नही मिलते, इसका क्या करिये गिला ।
जब आप गए है स्वयं के
विचारों को अच्छी तरह जान ।
ठीक रहेगा अब बनाना
अपनी अलग ही एक पहचान ।
करिये वो ही जो आपको
आपकी आत्मा को अच्छा लगता है ।
व्यस्त रखिये अपने को
फिर देखिये अकेलापन कैसे भगता है ।
तो किसी को कचोटता है ।
कोई इससे बोर होता है
तो किसी को ये उदासीन करता है ।
किसी का समय कटना दुभर करता है
तो किसी को उसकी, अप्रियता का आभास कराता है ।
कई वार यंहा तक होता है कि -
आप सबके साथ होते है तब भी ,ये आपके साथ होता है।
सबसे आपके विचार नही मिलते है
इसीसे, इसका आभास होता है ।
खुश रहिये कि सब का साथ है आपको मिला
विचार नही मिलते, इसका क्या करिये गिला ।
जब आप गए है स्वयं के
विचारों को अच्छी तरह जान ।
ठीक रहेगा अब बनाना
अपनी अलग ही एक पहचान ।
करिये वो ही जो आपको
आपकी आत्मा को अच्छा लगता है ।
व्यस्त रखिये अपने को
फिर देखिये अकेलापन कैसे भगता है ।
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